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ईमेल से हमें बोलने वाले की भावनाओं का पता अच्छे से नहीं चलता।

जब हम एक दूसरे से आमने सामने होकर बात करते हैं, हम उनके हाव भाव को देखते हैं और उसके हिसाब से उनकी बातों का मतलब निकालते हैं। अगर हमारा कोई दोस्त हमें हँसकर गाली दे दे, तो हम बुरा नहीं मानते और अगर हमारा कोई रिश्तेदार हमें गुस्से में आशिर्वाद दे, तो हमें अंदर से बुरा लगने लगता है। लेकिन ईमेल पर हम इन भावनाओं को नहीं समझ पाते और सामने वाले की बात का गलत मतलब निकाल लेते हैं।

डेनियल गोलमैन, जो कि ईमोशनल इंटेलिजेंस के लेखक हैं, कहते हैं कि हम ईमेल के मैसेज को कुछ नेगेटिव नजर से देखते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर भेजने वाला ईमेल लिखते वक्त खुश था, तो पढ़ने वाले को उसे पढ़कर ना तो खुशी होगी, ना दुख। अगर भेजने वाला ईमेल लिखते वक्त खुश नहीं था, तो पढ़ने वाला उसके ईमेल में लिखी गई बात को नेगेटिव तरीके से लेगा और अगर भेजने वाला ईमेल लिखते वक्त नेगेटिव था तो पढ़ने वाला उसके ईमेल को कुछ ज्यादा नेगेटिव नजर से देखेगा। 

ईमेल के साथ इसके अलावा बहुत सी समस्या है। जब हमें कोई ईमेल भेजता है, तो हम उसे रिप्लाई करने से खुद को नहीं रोक पाते। इसे रूल आफ रेसिप्रोसिटी कहते हैं। हमें अगर किसी व्यक्ति से कुछ मिलता है, तो हम उसके आभारी हो जाते हैं और उसे बदले में कुछ देने की कोशिश करते हैं। यह भावना बहुत गहरी होती है और किसी व्यक्ति का इससे बच पाना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए हम खुद को बार बार ईमेल का रिप्लाई करते हुए पाते हैं।

1970 के दशक में फिलिप कुन्ज़ नाम के एक व्यक्ति ने 600 अजनबियों को क्रिसमस की बधाई का कार्ड भेजे। वे सब के सब अजनबी थे, लेकिन उन लोगों ने भी बदले में उन्हें कार्ड भेजा और कुछ लोग तो उन्हें 15 साल तक कार्ड भेजते रहे। भले ही हमें वो ईमेल ना चाहते हुए भी मिले हों, हम उसका जवाब देने से खुद को रोक नहीं पाते।

आज के वक्त में किसी को ईमेल भेजने के लिए अच्छी राइटिंग की या फिर 50 कार्ड खरीदने की जरूरत नहीं है। सिर्फ एक ईमेल को हम एक बार लिख कर 100 लोगों को सेंड कर सकते हैं। इसलिए आज के वक्त में हमारे पास ज्यादा से ज्यादा ईमेल आते हैं और सभी का जवाब दे पाना लगभग नामुमकिन सा लगता है।

उन कामों पर ध्यान दीजिए जो असल में आपके लिए जरूरी हैं।

अब तक हमने देगा कि ईमेल के साथ क्या समस्या है और क्यों हम खुद को बार बार इसे चेक करने से नहीं रोक पाते। अब हम उस सवाल का जवाब देते हैं जिसके बारे में आप काफी वक्त से सोच रहे हैं – कैसे खुद को ऐसा करने से रोकें?

जैसा कि हम ने पिछले सबक में देखा, अगर कोई व्यक्ति हमें ईमेल भेजता है तो हम भी रूल आफ रेसिप्रोसिटी के हिसाब से उसे ईमेल भेजते हैं। इसका मतलब यह कि अगर आप किसी के ईमेल का जवाब नहीं देंगे, या फिर कम से कम लोगों को ईमेल भेजेंगे तो आपके पास कम से कम ईमेल आएँगे। 

यह जरूरी नहीं है कि आप हर किसी का ईमेल देखें या हर किसी को जवाब दें। यह भी जरूरी नहीं है कि आप तुरंत जवाब दें और यह तो बिल्कुल जरूरी नहीं है कि आप हर वक्त अपना ईमेल चेक करते रहें। तो सबसे पहले खुद से पूछिए कि आपके लिए जरूरी क्या है?

अपने काम में मतलब खोजना शुरू कीजिए। यह देखिए कि आपका काम आपको या फिर आपके अपने लोगों को कहाँ पर लेकर जा रहा है। खुद से पूछिए कि आप आज जो काम कर रहे हैं उसका 20 साल के बाद आपके कैरियर पर क्या असर होगा। क्या ईमेल चेक करने से आप कामयाब हो जाएंगे? अगर आपको जवाब ना में मिले, तो तुरंत इसे चेक करना कम कर दीजिए। 

जब तक आपको अपने ध्यान को किसी काम की जगह पर नहीं लगाएंगे, तब तक आप यह फैसला नहीं कर पाएंगे कि आपको असल में क्या करना चाहिए। तभी आप खुद को ईमेल चेक करने से रोक पाएंगे। अगर आपके पास करने के लिए कुछ नहीं है या फिर आप जो कर रहे हैं उसमें आपका मन नहीं लग रहा है, तो साफ बात है कि आप अपना ईमेल चेक करेंगे। 


आपको जो भी काम करने हैं,उसकी एक लिस्ट बना लीजिए। अगर कोई जरूरी काम आप पहले से कर रहे हैं और उसी वक्त आपको कोई और काम याद आता है, तो उसे लिख लीजिए। इस तरह से आप बार बार यह देख सकेंगे कि आपको असल में क्या करना है।

अपने ईमेल को सिर्फ दो या तीन बार चेक करने का एक नियम बनाइए।

बहुत से लोग होते हैं जो सुबह उठते ही अपना फोन चेक करते हैं। आप भी शायद उन लोगों में से एक हैं, वर्ना आप यह किताब नहीं पढ़ रहे होते।

सबसे पहले सुबह उठते ही अपना फोन मत चेक कीजिए। सुबह उठकर जब आप अपना ईमेल यह फिर कोई भी सोशल मीडिया खोलते हैं तो आप अपने दिन में दूसरों को दखलअंदाजी देने का मौका दे रहे होते हैं। सुबह सुबह हमारी एनर्जी सबसे ज्यादा होती है और अगर आप हर दिन के शुरुआत का एक घंटा अपने काम को दे देंगे, तो आप बहुत ज्यादा तरक्की कर सकते हैं। लेकिन जब आप सुबह सुबह उठकर सबके ईमेल का जवाब देने लगते हैं तो आप अपनी एनर्जी को इस बकवास काम में खर्च कर रहे होते हैं।

हो सकता है कि आपका जरूरी काम हो किसी व्यक्ति को ईमेल लिखकर भेजना। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं और क्या काम करते हैं, अपने सुबह के समय में फोन को खुद से दूर रखिए।

इसके अलावा हर वक्त अपना ईमेल चेक करना भी गलत है। आप अपना ईमेल चेक करने के लिए एक समय बनाइए। इस समय को हम बैचर का नाम देते हैं। एक्ज़ाम्पल के लिए आप एक बार अपना ईमेल तब चेक कीजिए जब आप अपने काम की शुरूआत करने जा रहे हों, एक बार तब जब आप अपना लंच कर के उठ रहे हों और एक बार तब जब अपना दिन खत्म कर रहे हों। ज्यादा से ज्यादा आप एक दिन में सिर्फ तीन बार अपना ईमेल चेक कीजिए।


ऐसे करने से आप अपना समय और एनर्जी, दोनों बचा सकते हैं। इसके अलावा आप अपने दिमाग को ज्यादा सेहतमंद भी रख सकते हैं। 2015 की एक स्टडी में यह बात सामने आई कि जो लोग अपना ईमेल कम चेक करते हैं, उनका तनाव कम रहता है। 

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