Book Summary

Hackers and Painters || Book Summary In Hindi || By Svm Ntpc Tech || Part – 3

आपके यूज़र का फीडबैक ही आपकी कामयाबी की निशानी है।

आपको अपने प्रोडक्ट को हमेशा अपने यूज़र के हिसाब से डिजाइन करना चाहिए। सबसे पहले आपको उसका एक प्रोटोटाइप तैयार कर के मार्केट में लाँच कर देना चाहिए ताकि आपको अपने असली यूज़र्स से फीडबैक मिल सके कि वे असल में आप से क्या चाहते हैं। ऐसा आप जितनी जल्दी कर सकेंगे यह आपके लिए उतना अच्छा होगा, क्योंकि इससे आपको जल्दी से जल्दी यह पता लग जाएगा कि आपका ग्राहक किस तरह की समस्या से परेशान है और आप किस तरह से उसे दूर कर सकते हैं।

जेन आस्टिन एक लेखिका थीं जो कि अपनी किताबों को सबसे पहले अपने परिवार और दोस्तों के सामने पढ़ती थीं। फिर वे उनसे पूछती थीं कि वे इस कहानी में क्या सुनना पसंद करेंगे और उसके हिसाब से उसमें सुधार करती थीं।

इस तरह से जब आप अपने यूज़र्न के हिसाब से एक साफ्टवेयर बनाएंगे, तो वे आपको उसके लिए पैसे भी देंगे। लेकिन अगर आप बहुत से ऐसे फीचर डाल दे रहे हैं जो कि देखने में अच्छे तो लग रहे हैं, लेकिन उससे यूजर की समस्या नहीं सुलझ रही है, तो वे उसे नहीं खरीदेंगे।

जब आपके यूजर आपके ऐप को खरीदने लगेंगे, तो उससे मिले पैसे को आप उस ऐप में फिर से लगा सकेंगे और उसे और बेहतर बनाकर ज्यादा यूजर्स को अपनी तरफ खींच पाएंगे। साथ ही जब आपके पास ज्यादा यूजर्स होंगे, तो आप उस साफ्टवेयर को अच्छी कीमत पर बेच भी पाएंगे। इसलिए अपने यूज़र्स के हिसाब से काम करना आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है क्योंकि इसी से आपकी कंपनी आगे जाएगी।

अलग- अलग जरूरतों के हिसाब से हम अलग अलग प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस का इस्तेमाल करते हैं।

आपने शायद बहुत सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस का नाम सुना होगा, जैसे C++, जावा, पाइथन और आप यह सोच रहे होंगे कि हमें इतनी सारी लैंग्वेजेस की जरूरत क्यों है। यह लैंग्वेजेस असल में कंप्यूटर को यह बताते हैं कि उन्हें क्या करना है। लेकिन एक लैंग्वेज पूरी तरह से कंप्यूटर से उस काम को नहीं करवा पाती जो हम करवाना चाहते हैं। कभी कभी वही काम जब हम किसी दूसरी लैंग्वेज का इस्तेमाल कर के करने की कोशिश करते हैं, तो वो आसानी से हो जाता है।

लेकिन असल में हमारा कंप्यूटर इन लैंग्वेजेस को नहीं समझता। वो सिर्फ 0 और 1 की भाषा को समझता है। इसलिए हमें एक कंपाइलर की जरूरत पड़ती है जो कि हमारी प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस को 0 और 1 में ट्रांस्लेट कर सके। फिर कंप्यूटर इस बाइनरी  लैंग्वेज को समझता है।

इसके बाद अलग अलग प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस की मदद से हम अलग -अलग काम करवा पाते हैं। एक्ज़ाम्पल के लिए C या C++ में लिखे गए कोड बहुत तेज चलने वाले साफ्टवेयर बनाते हैं जबकि इन्हें समझना मुश्किल होता है। ठीक इसी तरह से पाइथन में लिखे गए कोड आसान होते हैं लेकिन इससे बहुत धीरे काम करने वाले साफ्टवेयर बनते हैं। एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में आपको जो काम 10 लाइन का कोड लिखकर कर रहे हैं, वो किसी दूसरी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में सिर्फ 4 लाइन के कोड से हो जाता है। 

तो इसलिए हम अलग- अलग प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस का इस्तेमाल करते हैं अपनी अलग- अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए। लेकिन इन सारी प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस को समय के साथ बेहतर बनाया जा रहा है। पहले के वक्त में सिर्फ बड़ी कंपनियां ही एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज बनाती थीं और उसमें सुधार करतीं थीं। लेकिन आज के वक्त में कोई भी बहुत कम पैसे में जरूरी मशीनों को लाकर इस समय चलने वाली किसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस को अपडेट कर सकता है या फिर अपनी जरूरत के हिसाब से एक नई लैंग्वेज बना सकता है।

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