Computer

Comuter Kya Hai ? ( What Is Computer ) 01 Easy To Learn

जकल कम्प्यूटर हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। कम्प्यूटर का विकास मानव संसाधनों के विकल्प के रुप में हुआ है। (

आज हम अपने दैनिक जीवन के सभी क्षेत्रों में कम्प्यूटर का प्रयोग करते हैं। ( Computer Kya Hai )

कम्प्यूटर क्या है ? What Is Computer ?

C –  Common
O – Operating
M – Machine
P – Purpose
U – Use for
T – Technical
E – Education
R – Research

कम्प्यूटर शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी भाषा के कम्प्यूट (Compute) शब्द से हुआ है, जिसका अर्थ है गणना करना।

कम्प्यूटर का आज तेज गति की गणना के साथ-साथ बिना गणना वाले कार्यों में भी उपयोग हो रहा है।

कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रानिक डिवाइस है जो हमारे द्वारा दिये गये निर्देशों के नियंत्रण में डाटा पर प्रक्रिया

करके हमें परिणाम देता है, कम्प्यूटर कहलाता है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कम्प्यूटर निम्नलिखित कार्य करता है –
1. इनपुट उपकरण द्वारा डाटा लेना।
2. डाटा को मेमोरी में स्थानान्तरित करना।
3. डाटा को प्राप्त करके निर्देशों के अनुसार प्रोसेस करना।
4. डाटा का विश्लेषण करना।
5. डाटा को भविष्य के लिए संग्रहित करना।
6. प्राप्त परिणामों को आउटपुट उपकरण पर भेजना।

कम्प्यूटर की विशेषतायें ? (Features Of Computer)

  1. गति ( Speed ): कम्प्यूटर डाटा पर प्रोसेसिंग तीव्र गति से कर सकता है। कम्प्यूटर बड़ी से बड़ी तथा
    जटिल गणनाओं को भी तीव्र गति से हल कर सकता है।
  2. संग्रहण क्षमता (Storage Capacity) : कम्प्यूटर डाटा तथा सूचनाआंे के बहुत बड़े समूह को थोड़ी सी जगह
    में संग्रह कर सकता है। आवश्यकता पड़ने पर तुरन्त ही डाटा उपलब्ध भी करा सकता है।
  3. शुद्धता (Accuracy) : कम्प्यूटर सदैव शुद्ध परिणाम देता है। यदि कम्प्यूटर में डाटा तथा निर्देश सही दिये
    जाते है, तो कम्प्यूटर सदैव शुद्ध परिणाम देता है।
  4. व्यापकता (Versatility) : कम्प्यूटर का उपयोग हम विभिन्न प्रकार के कार्यों में कर सकते हैं। इसका उपयोग
    शिक्षा में, व्यापार, खेल इत्यादि में किया जा सकता है।
  5. स्वचालन (Automation) : कम्प्यूटर को किसी कार्य को करने के लिए एक बार निर्देश देने के बाद
    बार-बार निर्देश नही देने पड़ते हैं। कम्प्यूटर स्वाचालित रुप से अपना कार्य करता रहता है।

कम्प्यूटर की सीमांए ? (Limitations Of Computer)

  1. बुद्धि (IQ) : कम्प्यूटर एक मशीन है। इसमें स्वयं से निर्णय लेने तथा सोचने के लिए बुद्धि नहीं
    होती है।
  2. भावनारहित (No Feeling)  : कम्प्यूटर एक मशीन होने के कारण भावना रहित ( Feeling Less )होता है। यह
    भावनावश होकर कोई निर्णय नहीं कर सकता है।
  3. आत्मरक्षा की कमी  (Lack of Self Protection) : कम्प्यूटर एक शक्तिशाली मशीन होने पर भी अपनी रक्षा
    नहीं कर पाता है।
  4. बहुप्रयोग (Flaxibility) : आज पूरे विश्व में कम्प्यूटर का अनेक कार्यों में उपयोग किया जाता है। जैसे –
    गणना करना, मनोरंजन करना, शोध करना, शिक्षा आदि क्षेत्रों में।

कम्प्यूटर का विकास – (Evolution Of Computer)

कुछ आविष्कार ऐसे होते हैं जो समाज के सोचने समझने कार्य करने तथा रहन- सहन का तरीका बदल देते

हैं। कम्प्यूटर भी एक ऐसा ही आविष्कार है जिसने पूरे समाज को प्रभावित किया है। इसे कम्प्यूटर क्रान्ति कहा जाता हैं

हिन्दुस्तान के खगोलशास्त्री एवं गणितज्ञ आर्यभट्ट द्वारा रचित ग्रंथ आर्यभट्टीय में सर्वप्रथम शून्य तथा उसे

दर्शाने के विशिष्ट संकेत का उल्लेख किया गया था। तभी से संख्याओं को शब्दों में प्रदर्शित करने का चलन शुरु हुआ।

भारतीय लेखक पिंगला (लगभग 2000 ई0पू0) ने छंदशास्त्र का वर्णन करने के लिए उन्नत गणितीय प्रणाली

को विकसित किया और द्विआधारी (Binary 0,1) अंक प्रणाली का सर्वप्रथम विवरण प्रस्तुत किया। आज इन्ही जादुई
अंक 0 तथा 1 का प्रयोग कम्प्यूटर की संरचना में प्रमुख रुप से किया जाता है।

अबेकस (ABACUS) ¼Abundant Beads Addition and Calculation Utility System)

संक्षेप में अबेकस
(ABACUS) कहते हैं- इसका आविष्कार लगभग 3000 ई.पू. में चीन में एक गणना यंत्र के रूप में हुआ था। इस प्रयोग

अंकों की गणना करने में किया जाता था। इसमें गुणन व विभाजन नहीं होता, केवल जोड़ व घटाव की क्रिया ही होती

थी। यह लकड़ियों का एक आयताकार फ्रेम होता है, जिसमंे कुछ क्षैतिज छड़ें होती हैं, जिसमें कुछ गोले लगे होते हैं।

क्षैतिज छड़ों को विभाजित करती हुई एक लम्बवत् छड़ होती है, ऊपरी भाग के प्रत्येक दाने का मान 05 तथा निचले

प्रत्येक दाने का मान 1 होता है। इसको खिसकाकर जोड़ व घटाव की क्रिया होती है। इसके ऊपरी भाग को हैवेन व
निचले भाग को अर्थ कहते हैं।

स्लाइड रूल: – सन् 1622 ई. में विलियम आटरेड ( William Otrage) ने स्लाइड रूल  ( Slide Rule ) का आविष्कार
किया यह पहला एनालाग कम्प्यूटर था जो गुणा तथा भाग की क्रियाओं को लघुगुणक सारणी की सहायता से करता
था।

पास्कलाइन मशीन : सन् 1642 ई. में फ्रांसीसी गणीतज्ञ ब्लेज पास्कल ने पहला यांत्रिक कैलकुलेटर बनाया जिसे
एडिंग मशीन या पास्कलाइन मशीन कहा गया। यह मशीन घड़ी तथा आडोमीटर के सिद्धान्त पर कार्य करती थी।

रेकरिंग मशीन : सन् 1672 ई. में गाटफ्रेड लेबनिज जो जर्मन का दार्शनिक तथा गणितज्ञ था जो एडिंग मशीन में सुधार
करके एक नई मशीन का निर्माण किए जिसकी गणना करने की गति काफी तीव्र थी। इसे लेबनिज चक्र भी कहते हैं।
यह मशीन जोड़, घटाव, गुणा व भाग आदि सभी गणनाएं कर सकती थी।

जैकार्ड लूम : सन् 1801 ई. में फ्रांसीसी बुनकर जोसेफ लैकार्ड ( Josefh Jacquard ) ने एक ऐसी बुनाई मशीन का
निर्माण किया जो कपड़ों में डिजाइन या पैटर्न स्वतः देती थी। इसमें छिद्रयुक्त पंच कार्डों का उपयोग हुआ था।

चाल्र्स बैबेज का डिफरेंस इंजन :सन् 1822 ई. में अंग्रेज गणितज्ञ चाल्र्स बैबेज ने डिफरेंस इंजन का निर्माण किया,
जिसमें गियर ( Gear) शाफ्ट (Shaft) लगे थे, जो भाप (Steam) से चलता था। धन के अभाव में यह तैयार नहीं हो
सका। बाद में फिर इसका परिवर्तित रूप तैयार हुआ।

चाल्र्स बैबेज का एनालिटिकल इंजन : सन् 1837 ई. में चाल्र्स बैबेज ने डिफरेंस इंजन का परिवर्तित रूप में
एनालिटिकल इंजन ( Analytical Engine) बनाया, जो बाद में चलकर आधुनिक कम्प्यूटर का आधार बना।
इसलिए चाल्र्स बैबेज को कम्प्यूटर कम्प्यूटर का जनक ( Father of Computer ) कहते हैं।

सेन्सस टेबुलेटर : सन् 1880 ई. में अमेरिकीय हर्मन होलेरिथ ने अमेरिका की जनगणना कम समय में तेज गति से हो
सके इसके लिए सेन्सस टेबुलेटर
( Census Tabulator ) नामक मशीन तैयार किया। बाद में इन्होंने सन् 1896 में TMC
( Tabulating Mach ) नामक कम्पनी की स्थापना की।
सन् 1924 में इस कम्पनी का नाम बदलकर IBM ( International Business Machine ) कर दिया। आज यह
विश्व में कम्प्यूटर बनाने वाली सबसे बड़ी कम्पनी के नाम से प्रसिद्ध है।
एडा आगस्टा (Ada Augusta) ने बैबेज के एनालिटिकल इंजन में गणना के निर्देशों  को विकसित करने में
मदद की। अतः उन्हे विश्व में पहली प्रोग्रामर होने का श्रेय जाता है। उनके सम्मान में एक प्रोग्रामिंग भाषा का नाम
एडा (AD) रखा गया।1941 ईस्वी में ‘कोनार्ड जुसे’ ने   ZUSE – Z3.  नामक मशीन बनाई जो Binary Arithmetic और Floating
Point Arithmetic संरचना पर आधारित सर्वप्रथम विद्युतीय कम्प्यूटर (First Electronic Computer) था।

  1. में अमेरिकी सैन्य शोधनशाला में ENIAC'( Electronic Numerical Integrator and Computer ) का निर्माण किया जो Decimal Arithmetic संरचना पर आधारित सर्वप्रथम कंप्यूटर था |
  2. 1948 में Manchaster Small Scale Experimental Machine पहला ऐसा कम्प्यूटर बना जो किसी
    प्रोग्राम को Vaccume Tube में संरक्षित कर सकता था।
  3. 1944 में Dr. Howard Aiken ने Automatic Sequence Controlled Calculator नामक मशीन बनाई।
    बाद में इस मशीन का नाम Mark -1 रखा गया। यह विश्व का पहला Electromechanical Computer
    था।

कम्प्यूटर की पीढ़िया (GENERATIONS OF COMPUTER)

कम्प्यूटर के विकास क्रम को कम्प्यूटर की तकनीक में हुए परिवर्तन के आधार पर पाँच पीढ़ियों में बाँटा गया है।

  1. प्रथम पीढ़ी (First Generation) : कम्प्यूटरांे की प्रथम पीढ़ी का समय काल 1946 से 1959 तक माना
    जाता है । इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों की विशेषतांए निम्नलिखित थी:-
    1. Vaccume Tube का प्रयोग।
    2. मशीनी तथा असेम्बली भाषा में प्रोग्रामिंग
    3. पंचकार्ड पर आधारित। मैमोरी के रुप में मैग्नेटिक ड्रम का प्रयोग।
    4. आकार में बहुत बड़े, कम विश्वसनीय।

प्रमुख कम्प्यूटर –

  1. एनिएक ENIAC इलेक्ट्रानिक न्यूमेरिकल इण्टीग्रेटर एण्ड कैलकुलेटर।
  2. एडवैक EDVAC इलेक्ट्रानिक डिस्क्रीट वैरियेबल आटोमैटिक कम्प्यूटर।
  3.  एडसैक EDSAC इलेक्ट्रानिक डिले स्टोरेज आटोमैटिक कैलकुलेटर।
  4. यूनीवैक UNIVAC यूनीवर्सल आटोमैटिक कम्प्यूटर।
  5. IBM-701, IBM-650

       2. द्वितीय पीढ़ी (Second Generation) : कम्प्यूटर की द्वितीय पीढ़ी का समय काल 1959 से 1965 तक
माना जाता है। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों की विशेषताएं निम्नलिखित थी:-

 1. ट्रांजिस्टर Transistor का प्रयोग।
 2. Cobal तथा Fortran जैसी उच्चस्तरीय प्रोग्रांमिंग भाषाओं का विकास।
 3. Memory के लिए मैग्नेटिक कोर का प्रयोग।
 4. Storage Device, Printer एवं Opertating System का प्रयोग।
 5. प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटरों से आकार में छोटे थे तथा ऊर्जा की कम खपत वाले थे।

प्रमुख कम्प्यूटर- IBM-1620, 1BM-7094, CDC-1604, CDC-3600 ,UNIVAC-1108

  3. तृतीय पीढ़ी (Third Generation) : कम्प्यूटर की तृतीय पीढ़ी का समय काल 1965 से 1971 तक
माना जाता है । इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों की विशेषतांए निम्नलिखित थी:-

  1. एकीकृत सर्किट (Integrated Circuit I.C.) प्रयोग।
  2. उच्चस्तरीय भाषाओं का प्रयोग जैसे – BASIC
  3. पोर्टेबल तथा आसान रख-रखाव वाले
  4. अधिक विश्वसनीय।
  5. आकार में छोटे तथा वजन में हल्के।
  6. प्रमुख कम्प्यूटर IBM-360 Series, Honeywell6000 series, PDP(Personal Data Processor),
    IBM-370/168,TDC-316

4. चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation)  : कम्प्यूटरों की चतुर्थ पीढ़ी का समय 1971 से 1980 तक माना
जाता है। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों की विशेषताएं निम्नलिखित थी –

  1. Very Large Scale Integrated (VLSI) Circuit का प्रयोग।
  2. उच्चस्तरीय प्रोग्रांमिग भाषाओं C, C++, DBASE आदि का प्रयोग।
  3. पोर्टेबल तथा विश्वसनीय।
  4. आकार में बहुत छोटे तथा तीव्र प्रोसेसिंग गति।
  5. Time Sharing, Real Time, Networks, Distributed Operating System का प्रयोग

प्रमुख कम्प्यूटर – DEC-10, STAR-1000, PDP-11, CRAY-1 (SUPER COMPUTER),
CRAY-X-MP(SUPER COMPUTER)

5. पंचम पीढ़ी (Fifth Generation) :  कम्प्यूटरो की पाँचवी पीढ़ी का समय काल 1980 से वर्तमान तक
है। इस पीढ़ी में भविष्य के कम्प्यूटरों को रखा गया है। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों का आकार बहुत छोटा हो गया
तथा इनकी प्रोसेसिंग गति बहुत अधिक होती हैं। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में कृत्रिम बुद्धिमता (Artiticial
Intelligence) विकसित की जा रही है। इस पीढ़ी के कम्प्यूटर नेटवर्क से जोड़े गये जैसे – इण्टरनेट।
मल्टीमीडिया का विकास भी इसी पीढ़ी में हुआ।

इस पीढ़ी के कम्प्यूटर Ultra Large Scale Integrated (ULSI) Microprocessor पर आधारित है।

प्रमुख प्रकार के कम्प्यूटर : Desktop, Laptop, Notebook, Ultrabook, ChromeBook

कम्प्यूटर के प्रकार (TYPES OF COMPUTERS)

सामान्य रूप से कम्प्यूटर का वर्गीकरण करना बहुत ही कठिन है, इसलिए इसे हम तीन आधारों पर
वर्गीकृत करते हैं –

  1. अनुप्रयोग के आधार पर कम्प्यूटरों का वर्गीकरण (TYPES OF COMPUTERS BASED ON
    APPLICATION)
  2. उद्देश्य के आधार पर कम्प्यूटरों का वर्गीकरण (TYPES OF COMPUTERS BASED ON
    PURPOSE)
  3. आकार के आधार पर कम्प्यूटरों का वर्गीकरण (TYPES OFCOMPUTERS BASED ON SIZE

 1. अनुप्रयोग के आधार पर कम्प्यूटरों का वर्गीकरण (TYPES OF COMPUTERS BASED ON
APPLICATION)

  1. एनालाॅग कम्प्यूटर (Analog Computer) : एनालाॅग कम्प्यूटर वे कम्प्यूटर होते हैं, जो भौतिक
    मात्राओं दाब, ताप, लम्बाई, हार्टबीट, ब्लडप्रेशर आदि को मापकर परिणाम देते हैं इनका उपयोग मुख्य
    रूप से चिकित्सा, विज्ञान तथा तकनीकी क्षेत्र में किया जाता है। इसका उदाहरण निम्न हैं –                                                                                                                           थर्मामीटर (Thermameter)- इसमें पारे के प्रसार से शरीर का तापमान मापा जाता है।
    स्पीडोमीटर (Speedometer) – यह गाड़ियों की गति को दर्शाता है।
  2. डिजिटल कम्प्यूटर ( Digital Computer ) : डिजिट (Digit) का अर्थ होता है अंक, अर्थात जो
    अंकों की गणना करता है उसे डिजिटल कम्प्यूटर कहते हैं। आज प्रयोग में आने वाले सभी कम्प्यूटर,
    डिजिटल कम्प्यूटर ही हैं। यह कम्प्यूटर डाटा को 0 तथा 1 में परिवर्तित करके उन्ह इलेक्ट्रानिक रूप में
    ले आता है।
  3. हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer ) : हाइब्रिड का अर्थ होता है संकरित अर्थात अनेक गुण
    धर्म से युक्त होना। Hybrid Computer में Analog तथा Digital Computer की मिश्रित तकनीक
    का प्रयोग किया जाता है। इन कम्प्यूटरों का प्रयोग ऐसे कार्यों में अधिक होता है जहाँ पर भौतिक
    परिणामों जैसे – तापमान, समय, करंट, वोल्टेज, रक्तचाप आदि को मापकर उनके आँकड़े एकत्र कर
    उन्हंे डिजिटल सिग्नल में परिवर्तित कर उन पर विभिन्न गणनाएं की जाती हैं।

         2. उद्देश्य के आधार पर कम्प्यूटरों का वर्गीकरण (TYPES OF COMPUTERS BASED ON
PURPOSE)

उद्देश्य के आधार पर कम्प्यूटर के निम्नलिखित दो प्रकार होते हैः-

  1. सामान्य उद्देश्यीय कम्प्यूटर (General Purpose Computer) : इन कम्प्यूटरों में अनेक
    प्रकार के सामान्य कार्यों को करने की क्षमता होती है। जैसे: शब्द प्रक्रिया (Word Processing) में
    Document तैयार करना, Database बनाना आदि। ऐसे कम्प्यूटर व्यापारिक संस्थान, शैक्षिक संस्थान,
    कार्यालय , बैंक, घर आदि में प्रयोग किये जाते हैं।
  2. विशेष उद्देशीय कम्प्यूटर (Special Purpose Computer) : इस प्रकार के कम्प्यूटर किसी
    विशेष कार्य के लिए निर्मित किये जाते है। इनके C.P.U की क्षमता उस कार्य विशेष के अनुरुप होती
    है। जिसके लिए ये निर्मित किये जाते हैं। इन्हे समर्पित कम्प्यूटर भी कहते हैं। क्योंकि ये मात्र एक कार्य
    के प्रति समर्पित होते हैं। इनका प्रयोग Film Studio, Medical Science मौसम विज्ञान, यातायात
    नियन्त्रण, समुद्र विज्ञान आदि क्षेत्रों में किया जाता है।
  3. आकार के आधार पर कम्प्यूटरों का वर्गीकरण (TYPES OFCOMPUTERS BASED ON SIZE )

1.  माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer) :  माइक्रो कम्प्यूटर सबसे अधिक प्रचलित सामान्य प्रयोग
के डिजिटल कम्प्यूटर हैं। माइक्रो कम्प्यूटर आकार में छोटे, वजन में हल्के तथा प्रयोग में सरल होते हैं।
माइक्रो कम्प्यूटर में एक ही C.P.U लगा होता है। इन कम्प्यूटरों पर एक समय में केवल एक ही यूजर
कार्य कर सकता है। अतः इन्हे ‘पर्सनल कम्प्यूटर (Personal Computer) या PC कहते है। माइक्रो
कम्प्यूटरों के अत्यधिक प्रयोग को देखते हुए सभी वर्गों के यूजर के लिए अलग अलग क्षमता, गति,
आकार, वजन तथा लागत के माइक्रो कम्प्यूटर विकसित किये गये हैं। जैसे – Desktop, Laptop,
Notebook, Pocket P.C., Palmtop, Ultra Book, ChromeBook, Tablet आदि।

2. मिनी कम्प्यूटर ( Mini Computer ) :

मिनी कम्प्यूटर मध्यम आकार के कम्प्यूटर होते हैं। मिनी
कम्प्यूटर में एक से अधिक CPU लगे होते हैं, जिससे इन पर एक से अधिक यूजर कार्य कर सकते
हैं। मिनी कम्प्यूटरों का प्रयोग बैंक ,रेलवे रिजर्वेशन केन्द्र, स्टाॅंक एक्सचेंज आदि ऐसी जगहों पर किया
जाता है, जहाँ एक ही Database पर अनेक यूजर कार्य करते है। Data Generla Nova, K-202,
CDC-160A, CDC-1700 कुछ प्रमुख मिनी कम्प्यूटर है।

3. मेनफ्रेम कम्प्यूटर (Mainframe Computer) :

मेनफ्रेम कम्प्यूटर आकार में बहुत बड़े तथा
मँहगे होते हैं। इन कम्प्यूटरों पर एक साथ हजारों यूजर कार्य कर सकते है तथा ये कम्प्यूटर बहुत से
प्रोग्राम को एक साथ execute कर सकते हैं। इन कम्प्यूटरों का प्रयोग ऐसे स्थानों पर किया जाता है
जहाॅें पर किसी भी प्रकार का Data Loss बहुत बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। जैसे – बैंक, स्टाॅंक
मार्केट आदि। अपनी तेज गति व विश्वसनीयता के कारण ये कम्प्यूटर ON-OFF Transaction
(रिकार्ड को बहुत जल्दी-जल्दी परिवर्तित करना) के लिए सर्वश्रेष्ंठ सिद्ध हुए हैं।

4. सुपर कम्प्यूटर ( Super Computer ) :

सुपर कम्प्यूटर सर्वाधिक शक्तिशाली कम्प्यूटर हैं। सुपर
कम्प्यूटर को ‘फाल्ट टाॅलरेन्ट’ (गलतियों को सहन करने वाला) कम्प्यूटर कहा जाता है। सुपर कम्प्यूटर
में अनेक CPU समान्तर क्रम (parallel) में कार्य करते हैं। इस क्रिया को Parallel Processing
कहते हैं। इन कम्प्यूटरों का प्रयोग अति महत्वपूर्ण तथा संवेदनशील कार्यो के लिए किया जाता है।
अन्तरिक्ष विज्ञान, परमाणु विज्ञान, मौसम विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।
चित्र-मेनफ्रेम कम्पयूटर
CRAY-2, CRAY-XMP-24, NEC-500, CDC-CYBER-205, CRAY-JAGUAR आदि प्रमुख
सुपर कम्प्यूटर है।
चित्र-सुपर कम्प्यूटर
जैसे:-
भारत द्वारा निर्मित प्रथम Super Computer PARAM है।

कम्प्यूटर के भाग (Components of Computer) :

कम्प्यूटर के भाग (Components of Computer) :

प्रत्येक कम्प्यूटर सिस्टम के निम्नलिखित भाग होते है।

इनपुट डिवाइसेज
स्टोरेज डिवाइसेज
प्रोसेसिंग डिवाइस
आउटपुट डिवाइसेज

  1. इनपुट डिवाइसेज ( Input Device ) :

इनपुट डिवाइसेज का प्रयोग कम्प्यूटर में डाटा को इन्टर करने
के लिए किया जाता है। इनपुट डिवाइसए यूजर तथा डिवाइस कम्प्यूटर के बीच एक कड़ी का कार्य करती है।
इनपुट डिवाइस डाटा को कम्प्यूटर के समझने योग्य संकेतो (0 तथा 1) में परिवर्तित करके कम्प्यूटर में इनुपट
करती है। कुछ प्रमुख इनपुट डिवाइस निम्नलिखित है।

2. की-बोर्ड ( Key-Board ) :

Keyboard एक प्रमुख Input Device है जो कि टाइपराइटर के
समान होता है। यह डाटा को 0 तथा 1 के Bit में बदलकर computer में input कराता है । की-
बोर्ड में सामान्यतः पाँच पक्रार की keys होती है।

Alphanumeric Keys : इसमें Alphhabet (A to Z, a to z) , Numeric ( 0-9) और अन्य विशेष कैरैक्टर होते हैं। इनका प्रयोग अक्षर तथा अंक लिखने के लिए किया
जाता है।

Numeric keys : इसमें 0 जव 9 अंक , +,-,*,/ और Num Lock, PageUp, Page
Down, End, Home, Enter Keys होती है। इनका प्रयोग अंकीय डाटा लिखने के लिए
किया जाता है।

Functions Keys : इसमें 12 Function Keys होती हैं जो keyboard में सबसे ऊपर
होती हैं। प्रत्येक Function keys का कार्य अलग-अलग होता है।

Control Keys : इन Keys की सहायता से Cursor के Movement को Control
किया जाता है।

Special Purpose keys : इन Keys का प्रयोग कार्य के अनुसार किया जाता है जैसे
–Caps lock,Shift,Enter,Backspace,Tab,Delete,Escape,Spacebar, Alt,
Ctrl, Insert, Print Screen Keys आदि |

माउस ( Mouse ) : Mouse का आविष्कार ‘डगलस सी0ई0 जेलवर्ट में किया था। यह एक
सर्वाधिक प्रचलित Pointing Input Device हैं। इसका प्रयोग Graphical User Interface
(G.U.I.) में किया जाता है। यह कम्प्यूटर की Screen पर Cursor के Movement को
नियन्त्रित करता है। सामान्यतः Mouse में दो Button होते हैं। इन्हे Left Button तथा Right
Button कहते हैं तथा मध्य में Scroll Bar ठंत होता है।

जाॅयस्टिक ( Joystick ) : Joystick भी एक Pointing Device है। इसका प्रयोग मुख्यतः
Computer Aided Designing (CAD) करने तथा Computer Game खेलने में किया जाता है। इसमें एक Handle लगा होता है जो 360 पर घुमाया जा सकता है।

टैकबाॅल ( Trackball ) : Trak Ball एक Pointing Input Device है । इसका प्रयोग
मुख्यतः Laptop या NetBook में होता है। ट्रैकबाॅल को घुमाने की आवश्यकता नही होती। अतः
यह कम जगह लेता है। इसमें Ball ऊपरी सतह पर लगी होती है जिसे अंगूठे से घुमाते है और
उंगलियाॅं बटन पर होती हैं।

लाइटपेन ( Ligh Pen ) : यह एक Pointing Input Device है जो Pen की तरह होती है।
इसमें एक Pad तथा एक Pen होता है। Pen को Pad पर चलाते है तो Pointer घूमने लगता है।

स्कैनर ( Scanner ) : स्कैनर एक Input Device है जो Photo Copy मशीन की तरह कार्य
करता है। स्कैनर किसी Image को Digital Form परिवर्तित करके कम्प्यूटर की Memory में
Store कर लेता है।

ऑप्टिकल मार्क रीडर ( Optical Mark Reader ) : इसे संक्षेप में OMR कहते हैं। यह एक
ऐसी Input Device है जो कागज पर पेन या पेन्सिल के चिन्ह की उपस्थिति और अनुपस्थिति की
जाॅंच करती है। इससे कागज पर प्रकाश डाला जाता है। जहाँ चिन्ह उपस्थित होगा वहाँ से परावर्तित
प्रकाश की तीव्रता कम होगी। इसका प्रयोग उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में किया जाता है।

बार कोड रीडर (Bar Code Reader ) : Bar Code Reader एक Input Device है
जिसका प्रयोग Bar Code के रुप में छपे डाटा को पढ़ने के लिए किया जाता है। Bar Code
Reader, Bar Code Image को Scan करता हैए उसे Alphanumeric Value में परिवर्तित
करता है और फिर उसे Computer में भेज देता है।

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