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एक्सिडेंटल जीनियस (Accidental Genius) || Book Summary In Hindi || By Svm Ntpc Tech || Part – 4



अपने लिखे गए आइडियाज़ को बाँटिए और लिखने के लिए खुद को ज्यादा समय दीजिए।

अगर आप अपने आइडियाज़ को अपने तक ही रखेंगे तो आपको कभी पता नहीं चलेगा कि क्या आपके आइडियाज़ वाकई अच्छे हैं या नहीं। आप दूसरे लोगों को अपनी लिखी हुई चीजें दिखाइए और उनसे पूछिए कि उन्हें ये कैसा लगा। इससे आप अपने विचारों के साथ साथ दूसरे के विचारों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और साथ ही अपनी कमियों को समझ सकते हैं।

जब हम किसी चीज से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं तो हम उसकी बुराइयों को नहीं देख पाते हैं। इसलिए अगर आप अपने आइडियाज़ में खराबियाँ ढूँढ कर उन्हें और बेहतर बनाना चाहते हैं तो आप अपने किसी दोस्त को वे आइडियाज़ दिखाइए और उनसे सलाह लीजिए कि आपको क्या करना चाहिए जिससे आपका काम और अच्छा हो सके।

इसके अलावा आप रोज की जिन्दगी से भी काफी सारे आइडियाज़ पा सकते हैं। अगर आप अपने आस पास देखें तो आपको बहुत सारे ऐसी घटनाएँ मिलेंगी जिनसे प्रेरित हो कर आप अपने काम में सुधार कर सकते हैं।

आप अपनी आँखों को हमेशा कुछ ढूंढते रहने के काम पर लगाइए। आप अलग अलग लोगों से मिलकर उनके बारे में जानने की कोशिश कीजिए। अगर आपको कोई कहानी पसंद आती है तो आप उसे अपने आइडिया के साथ जोड़ने की कोशिश कीजिए।

अगर आप अपने आइडिय को अच्छे से नहीं लिख पा रहे हैं तो आप अपने आप को ज्यादा समय दीजिए। इस समय में आप ज्यादा सोच सकते हैं। आप किसी दूसरी किताब में अपने काम की कोई चीज़ ढूंढ भी सकते हैं।

आप इस लम्बे समय को कई भागों में बांटिए। आप कुछ समय तक लिखिए और फिर अपने लिखे हुए को पढ़िए जिससे आपको अपनी गलतियाँ मिल सकें और आप उसमें कुछ जरूरी बदलाव कर सकें। इसके बाद फिर से आप फिर से लिखिए और फिर उसमें सुधार कीजिए। धीरे धीरे आप अपने काम के पूरा कर लेंगे।

आप अपनी लिखी गई चीज़ों को संभाल कर रखिए।

आप जो भी लिखें, उसे कहीं न कहीं संभालकर जरूर रखिये। अपने आइडिया को कभी भी खोने मत दीजिए। ऐसा करने पर जब आप बाद में उसे पढ़ेंगे तो आप उन आइडियाज़ में छुपी हुई खराबी को पहचान कर उन्हें एक नया रुख दे सकते हैं। 

अगर आप अपने सारे आइडियाज़ को संभाल कर रखें तो आप उन में से बहुत सारी काम की चीज़ों को निकाल कर कुछ नया और बेहतर बना सकते हैं। आपके आइडियाज़ किसी न किस मोड़ पर आपके काम जरूर आएंगे। उनका इस्तेमाल कर आप भविष्य में आने वाली परेशानियों से निपट सकते हैं या फिर भविष्य में उन आइडियाज़ पर फिर से काम शुरू कर सकते हैं।

इसलिए आप सभी की एक फाइल बना कर उन्हें अलग अलग भागों में बाँट कर अपने कंप्यूटर में सेव कर लीजिए। इनका इस्तेमाल आप प्रॅाम्प्ट की तरह कर सकते हैं।

लिखने से पहले आप टॅापिक के बारे में मत सोचिए। आपके अंदर जो भी बातें आती हैं आप बस उसे लिखते जाइए। बाद में आप अपने इन आइडियाज़ का इस्तेमाल कर के किसी खास टॅापिक पर कुछ लिख सकते हैं।

इसके साथ ही आप अपने कंप्यूटर में सभी आइडियाज़ को सेव करते रहिए। आप अपने ऊपर ज्यादा भार मत लीजिए। अपने सारे आइडियाज़ को एक साथ जोड़कर कुछ नया बनाने की कोशिश कीजिए। उसे बार बार पढ़िए और बार बार उसमें सुधार कीजिए।


इस तरह से रोज़ थोड़ा थोड़ा लिख कर आप अपनी सोच को एक नया और अच्छा आकार दे सकते हैं। शायद एक दिन आप एक किताब भी लिख दें।

कुल मिला कर –

आपका दिमाग यादों और विचारों का समुद्र है। इस समुद्र में बहुत सारे विचार होते हैं जिन्हें संभाल कर रख पाना आसान काम नहीं है। आप अपने दिमाग में आए अच्छे विचारों को फ्रीराइटिंग की मदद से समेट कर रख सकते हैं और साथ ही उन्हें बार बार पढ़कर उनमें काफी हद तक सुधार भी कर सकते हैं।

क्या करें?

अपने लिखने की प्रक्रिया में बदलाव करने की कोशिश कीजिए।


एक बार आपने फ्रीराइटिंग कर ली तो आप अपने लिखी हुई चीजों को पढ़िए। आप उसमें कुछ बदलाव कीजिए। अगर जरूरत हो तो आप फिर से एक नई शुरुआत कीजिए। देखते ही देखते आप अपने आप को एक नए रास्ते पर खड़ा पाएंगे।

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