Book SummaryCommunication

एक्सिडेंटल जीनियस (Accidental Genius) || Book Summary In Hindi || By Svm Ntpc Tech || Part – 3


पुराने आइडियाज़ को छोड़कर आप नए और बेहतर आइडियाज़ के लिए जगह बना सकते हैं।

लिखते वक्त ज्यादा सोचने से आप अपने विचारों को उलझा सकते हैं। ऐसे में आपकी लिखी गयी बातों को समझ पाना मुश्किल हो सकता है। अपने आइडियाज़ को आसान से आसान शब्दों में लिखने के लिए आप ज्यादा मत सोचिए। ज्यादा सोचना हमेशा ही नुकसानदायक होता है।

आप समस्या की जड़ तक पहुँचने की कोशिश कीजिए। इसके लिए आप फैक्ट का सहारा ले सकते हैं।

मान लीजिए आप किसी कंपनी में काम कर रहे हैं जिसकी सेल्स में गिरावट आई है। आपने जब इसकी वजह जानने की कोशिश की तो आपको पता लगा कि प्रोडक्ट की क्वालिटी खराब है। क्वालिटी के खराब होने की वजह थी कि कर्मचारी अपना काम सही से नहीं कर रहे थे और उनके सही से काम ना करने की वजह थी कि उन्हें अच्छी सैलेरी नहीं मिल रही थी। इस तरह से एक फैक्ट आपके अंदर बहुत सारे विचार पैदा कर सकता है और आप समस्या की जड़ तक पहुँच सकते हैं।

समस्या से निकलने का दूसरा तरीका है कि आप पुराने आइडियाज़ को छोड़ दीजिए। अगर आपके पास हर बार कोई समस्या आ रही है तो इसका मतलब है कि आपके सोचने और काम करने का तरीका गलत है। आप पुराने आइडियाज़ को छोड़कर खुद से ये सवाल कीजिए कि उनमें कहाँ पर खराबी थी।

ऐसा करने से आप अपनी कमियों को जान सकेंगे। आपको पता लगेगा कि असल समस्या कहाँ है और उससे निपटने के लिए आप क्या कर सकते हैं। जब आप अपने अंदर नए आइडियाज़ लाने की कोशिश करेंगे तो आपके पास बहुत सारे आइडियाज़ हो जाएंगे और आप तब आसानी से चुन सकते हैं कि कौन सा आइडिया आपके लिए सही है।

आप तुरंत ही एक पर्फेक्ट आइडिया बनाने की कोशिश मत कीजिए। आप सबसे पहले समस्या को पहचानिए और फिर उससे निपटने के जितने हो सके उतने नए आइडियाज़ ले कर आइए। फिर आप उन आइडियाज़ में से सबसे अच्छे आईडिया को ढूंढिए। इससे आप अपनी परेशानी से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं |

फ्रीराइटिंग में खुद से झूठ बोलना गलत बात नहीं है।

खुद से झूठ बोलने का मतलब है अपने आप को असलीयत से कहीं दूर किसी सपने की दुनिया में ले जाना। इस तरह से सोचने पर आपके अंदर नए नए आइडियाज़ आ सकते हैं। अगर आप लिखते वक्त सिर्फ असल दुनिया में रहेंगे तो आप अपने अंदर की सोचने की क्षमता को कभी बाहर नहीं ला सकेंगे।

ख्यालों की दुनिया में आप कुछ भी सोच सकते हैं जिससे आप हर कैद से आजाद हो जाते हैं और अपने आप को कुछ भी सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

अपनी सोच को बढ़ावा देने का दूसरा तरीका है कि आप सोचिए कि कोई आपके बगल में बैठ कर आपसे सवाल कर रहा है। वो आपको आइडियाज़ दे रहा है और आपके अंदर सुधार करने की कोशिश कर रहा है। उसकी सोच आपकी सोच से अलग और बेहतर है।

अगर आप ऐसा सोचेंगे तो आप अपने आप को उसके जैसा बनाने की कोशिश करेंगे। आप जब भी उससे बात करेंगे तो आप अपने आप को ऊपर उठा कर अपनी सोच को उसके लेवल में लाकर बात करने की कोशिश करेंगे जिससे आपके सोचने की क्षमता बढ़ जाएगी।

लेकिन आप इस बात का ध्यान रखें कि आप उस सोच वाले व्यक्ति को पूरी तरह से पर्फेक्ट ना बना दें। आप यह मत सोचिए कि महात्मा गांधी या एपीजे अब्दुल कलाम आपके बगल में बैठ कर आपको मशवरा दे रहे हैं। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप अनजाने में ही अपनी कमियों को उनसे छुपाने की कोशिश करेंगे जिसकी वजह से आप कभी ऊपर नहीं उठ पाएंगे।


आपके खयालों का व्यक्ति आपके दोस्त जैसा होना चाहिए जिससे आप खुलकर सारी बातें कर सकें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close